मण्डी परिषद
 राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद, उत्तर प्रदेश

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मण्डी परिषद की स्थापना
 

मण्डी समितियों के कार्य संचालन तथा उनकी विकास योजनाओं की निगरानी, नियंत्रण और मार्गदर्शन के लिए वर्ष 1973 में प्रदेश स्तर पर राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद की स्थापना  की गयी मण्डी परिषद के कुशल नेतृत्व में मण्डी समितियों ने अधिनियम के प्राविधानों को प्रभावी ढंग से लागू कर कृषि मण्डियों में किसानों को न्यायोचित व्यवहार तथा उनकी उपज का प्रोत्साहन मूल्य दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है फलस्वरूप विनियमित मण्डियों की आवक और आय में उत्तरोत्तर वृद्वि होती गयी है कृषि वर्ष 1972-73 में प्रदेश की मण्डियों की कुल आवक 37.90 लाख मी० टन थी, जो प्रतिवर्ष बढते हुए कृषि वर्ष 2009-10 में 417.38 लाख मी० टन हो गयी है इसी प्रकार समस्त मण्डियों  की कुल आय वर्ष 1972-73 में रू० 1.92 करोड थी, जो कृषि वर्ष 2009-10 में रू० 772.47 करोड  हो गयी है|

 
किसानों को लाभ
  • किसानों व व्यापारियों पर लागू बहुव्यापार कर व लेवी को नियन्त्रित करना|
  • मीट्रिक प्रणाली से सही माप तौल सुनिश्चित करना जिससे किसानों व व्यापारियों को उनका न्यायोचित मूल्य मिल सके|
  • मण्डी समितियों की स्थापना जिसमें किसानों की समुचित भागीदारी रहे|
  • मण्डी के विकास हेतु मद के उपयोग से किसानों की उचित भूमिका सुनिश्चित करना|
  • किसानों व व्यापारियों के बीच विवाद होने पर मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुये उनका समुचित निराकरण करना|
  • मण्डी स्थलों में आवश्यक सुख सुविधाओं की व्यवस्था करना|
  • मण्डी स्थलों में बेहतर भण्डारण की सुविधा प्रदान करना|
  • किसानों व व्यापारियों से गैर कानूनी कटौतियों को बन्द करना
  • बाजार भावों व अन्य उपयोगी सूचनाओं का संग्रह और प्रचार प्रसार करना|